Facebook Hitech Smart Watch may be launched by 2022.

सोशल मीडिया एप्लीकेशन पर भारत सरकार ने और कुछ नए गाइडलाइंस शुरू किए हैं। जिसमें  वल्गर करंट एंड या फिर डिजिटल मीडिया पर फेक न्यूज़ या फिर कुछ ऐसी गंदी बातें की परमिशन नहीं है।

सोशल मीडिया

नेटफ्लिक्स और ऐमेज़ॉन जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म और फेसबुक ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए भारत सरकार ने सख्ती दिखाते हुए गाइडलाइन जारी की है। 

नई गाइडलाइन के मुताबिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत पर उसे हटाना होगा, साथ ही डिजिटल मीडिया को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह ही सेट करना होगा। गौरतलब है कि लंबे वक्त से और भारत सरकार के बीच विवाद चल रहा था जिस वजह से सरकार ने कदम उठाए हैं।

सोशल मीडिया एप्लीकेशन यूजर पे क्या असर होगा ?

  •  शिकायतें सुनी जाएंगी – उसके पास सोशल मीडिया पोस्ट के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सिर्फ सोशल मीडिया कंपनियों को अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
  •  शिकायत कौन सुनेगा –  शिकायत निपटान नियुक्त करने अधिकारी का नाम भी बताना होगा।
  •  तय समय में कार्यवाही – अभी उसको कोई टाइम फ्रेम भी नहीं मिलता था , लेकिन नई  गाइडलाइन के तहत शिकायत अधिकारी को 24 घंटे के अंदर सुनवाई करने होगी और 15 दिन के अंदर शिकायत को निपटाना होगा।

 क्या है नई सोशल मीडिया एप्लीकेशन गाइडलाइन?

  •  एक सोशल मीडिया कंपनियों को आपत्तिजनक पोस्ट को ट्रेस करना होगा यानी सोशल मीडिया पर सबसे पहले किसने शुरू की अगर भारत के बाहर से उसका ओरिजन है तो बताना होगा।
  •  देश की सुरक्षा मामलों में पोस्ट  जानकारी देनी होगी आरोप साबित होने पर 5 साल से ज्यादा की सजा हो सकती है।
  •  कानूनों और नियमों पर अमल सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया कंपनी को जीप कंपास ऑफिसर नियुक्त करना होगा जोकि  भारत में रहने वाला होना चाहिए।
  •  सोशल मीडिया कंपनियों को हर महीने कंपाइल रिपोर्ट जारी करने होगी , जिसमे यह बताना होगा कि कितनी शिकायतें आए हैं और उस पर क्या कदम उठाए हैं.
  •  ऐसी कंपनियों को अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर भारत में मौजूद उनका एक कांटेक्ट एड्रेस बताना होगा।
  •  सोशल मीडिया पर मौजूद यूजर्स वेरीफाइड हो इसके लिए वॉलंटरी वेरिफिकेशन मेकनिज्म बनाना होगा एसएमएस पर ओटीपी के जरिए इस तरह की वेरिफिकेशन हो सकता है।
  •  अगर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म किसी यूजीसी कंटेंट को रिमूव करता है तो उसको सूचना और कारण बताना होगा।
  • ओटीटी और डिजिटल मीडिया को डिटेल्स डिस्क्लोजर पब्लिक करने होंगे ताकि पब्लिक को पता लगे इंफॉर्मेशन कहां से पाते हैं।
  • अपने कंटेंट को पांच कैटेगरी में क्लासिफाइड करना होगा यूनिवेर्सल, यू A7 प्लस, यू 8 प्लस, यू A6 प्लस और यू (यानी एडल्ट)।
  •  यू8  प्लस और इससे ऊपर की कैटेगरी के लिए पेरेंट्स लॉक की सुविधा देनी होगी ताकि बच्चों को ऐसे कंटेंट से दूर रखा जा सके।
  •  एडल्ट कंटेंट देखने लायक उम्र है या नहीं इसका भी वेरिफिकेशन मैक्सिमम बनना होगा।

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